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चिम्बोराजो: अंतरिक्ष के सबसे करीब

चिम्बोराजो: अंतरिक्ष के सबसे करीब

चिम्बोराजो ज्वालामुखी की खड़ी ढ़लान पर ऊपर की ओर जाने का प्रयास कर रहे एलैग्जैंडर वोन हमबोल्ट के हाथों में तीखी चटटानें चुभ रहीं थीं। यह 23 जून, 1802 की बात है। बाद में मशहूर जर्मन खोजी एलैग्जैंडर ने अपनी डायरी में लिखा था, “हमारे साथ आए लोग ठंड से डरकर हमें छोड़ कर लौट गए थे।”

स्थानीय लोगों का कहना था कि ये गोरे पहाड़ी की चोटी के आस-पास जमी बर्फ तक भी नहीं पहुंच पाएंगे परंतु उन्होंने एलैग्जैंडर को कम करके आंका था। हालांकि, वह चोटी तक तो नहीं पहुंच सके परंतु वह पूर्व में 6268 मीटर ऊंचे इस ज्वालामुखी पहाड़ पर चढ़ने का प्रयास कर सके अन्य यूरोपियनों से कहीं ज्यादा ऊंचाई तक पहुंच सके थे।

1880 में अंग्रेज पर्वतारोही एडवर्ड विम्पर इस ज्वालामुखी की चोटी तक पहुंचने वाले प्रथम इंसान बने थे।

ट्रैकिंग के विशेष इंतजाम

एलैग्जैंडर को स्थानीय गाइडों की कमी की शिकायत थी परंतु आज ऐसा नहीं है। इक्वाडोर की राजधानी किवटो में ज्वालामुखी तक ट्रैकिंग के इंतजाम मिल जाते हैं। स्थानीय गाइड्स की मदद से शौकिया तौर पर पर्वतारोहण करने वाला कोई भी व्यक्ति इसकी चोटी तक पहुंच सकता है। बेशक अब इस पर्वत की चोटी तक पहुंच कर कोई कीर्तिमान नहीं बनाया जा सकता है, आज भी लोग इस पर चढ़ाई करने को लेकर रोमांचित रहते हैं। वैसे प्रयास करने वाले कई लोग अधिक ऊंचाई तथा कठिन परिस्थितियों की वजह से असफल रहते हैं।

29 वर्षीय गाइड विली रिवेरा इजा भी पर्यटकों को इस पहाड़ की चोटी तक ले जाते हैं। 5200 मीटर की ऊंचाई से कुछ खड़ी चढ़ाई के आगे एक ग्लेशियर आता है। इस ऊंचाई पर ही हवा बहुत हल्की होने लगती है जिससे सांस लेने में तकलीफ महसूस होती है।

ऊंचाई का अभ्यस्त करना जरूरी

अधिक ऊंचाई की वजह से इस पर बिना तैयारी के चढ़ाई करना जानलेवा हो सकता है। पहले शरीर को ऊंचाई का आदी बनाना पड़ता है ताकि ‘सोरेचे’ यानी ‘एलटीच्यूड सिकनैस’ (ऊंचाई की वजह से बीमार पड़ना ) से बचा जा सके।

200 वर्ष पूर्व इस बीमारी के लक्षणों की व्याख्या सर्वप्रथम एलैग्जैंडर हमबोल्ट ने की थी। उन्होंने लिखा था, “हमें अजीब महसूस हो रहा था, लगातार चक्कर आ रहे थे और जैसे हालात में हम थे, ऐसा होना बहुत खतरनाक था।” उन्हें उल्टी जैसा भी महसूस होने और मसूड़ों से खून बहने लगा था।

इसी वजह से चिम्बोराजो पर जाने के लिए एक सप्ताह का वक्त चाहिए। अच्छी बात है कि इक्वाडोर में 300 किलोमीटर में फैले ज्वालामुखी पर्वत इसके लिए तैयार होने के अनेक विकल्प देते हैं। चिम्बोराजो पर चढ़ाई से पांच दिन पहले 4263 मीटर ऊंचे फुया फुया तथा उसके बाद 4630 मीटर ऊंचे इम्बाब्बुरा पर चढ़ते हैं और 5000 मीटर ऊंचे कयाम्बे पर एक छोटी-सी टैक्नीकल ट्रेनिंग दी जाती है।

अंतरिक्ष, सूर्य और चांद के सबसे करीब

चिम्बोराजो पर 5600 मीटर के बाद चढ़ाई लगातार कठिन होने लगती है। हालांकि, चोटी पर पहुंचने की सफलता का रोमांच सारी थकान गायब कर सकता है। यह तथ्य भी कम खास नहीं है कि इस ज्वालामुखी की चोटी पर खड़े होने का मतलब है कि आप धरती से अंतरिक्ष और सूर्य व चांद के सबसे करीब हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि धरती के सबसे ऊंचे पर्वत एवरैस्ट की तुलना में धरती का व्यास भूमध्य रेखा पर अधिक है।

चिम्बोराजो पर्वत पर गाईड विली रिवेरा इजा कोई 100 से ज्यादा बार चढ़ चूका है। उसके अनुसार शरीर को ऊंचाई का अभ्यस्त किए बिना चिम्बोराजो पर चढ़ाई सफल नहीं हो सकती। वह पर्यटकों को यह चेतावनी भी देते हैं कि कभी-कभी ऊंचाई पर भालू या भेड़िए दिखाई देने लगते हैं जबकि वास्तव में वहां ऐसा कुछ नहीं होता है।

चिम्बोराजो ज्वालामुखी कई किलोमीटर में फैला है। इक्वाडोर सबसे ज्यादा ज्वालामुखियों वाले देशों में से एक है जो हर वक्त ज्वालामुखी विस्फोटों के लिए अलर्ट रहता है। पिछली बार अगस्त 2015 में यहां ट्रैकिंग के लिए सबसे लोकप्रिय कोटोपाक्सी ज्वालामुखी फूटा था।

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