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विधवाओं की पहाड़ी: जनाबाद Women’s Hill, Zanabad, Kabul

विधवाओं की पहाड़ी: जनाबाद Women’s Hill, Zanabad, Kabul

काबुल के पास एक पहाड़ी जनाबाद है। यह काबुल शहर के पूर्वी छोर पर तराई में है। इस सुनसान जगह पर एक के बाद एक विधवाओं ने अपनी कड़ी मेहनत और लग्न से गारे और पत्थर से मोटी दीवारें खड़ी करके अपना घर बना लिया है। आज इसे “विधवाओं की पहाड़ी” के नाम से जाना जाता है।

करीब 2 दशक पहले विधवाओं ने जब इस जमीन को घेर कर रहना शुरू किया तो शासन की ओर से इसका विरोध नहीं किया गया। इसके बाद यहां जंग में मारे गए जवानों की विधवाएं और बेसहारा महिलाएं अपना डेरा जमाने लगीं। अनुमान के अनुसार दशकों से जारी गृह युद्ध के चलते अफगानिस्तान में विधवाओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

एक दौर था जब अफगानिस्तान में विधवा महिलाएं पति के बाद उसी पुराने मकान में अपनी बची-खुची पूंजी के साथ गुजर-बसर कर लेती थीं। शुरू में रिश्तेदार भी मदद करते थे लेकिन समय के साथ ऐसी सभी विधवा महिलाओं को अपने पति के घर में रहने का मोह छोड़ना पड़ा जिनके पास जिंदा रहने के लिए जरूरी पूंजी नहीं थी या जो अपने ही रिश्तेदारों की शारीरिक भूख शांत करने में नाकामयाब रहती थीं।

अफगानिस्तान के अत्यधिक रूढ़िवादी समाज में शादी के बाद पति की ‘सम्पत्ति’ बनने से पहले महिलाओं को पिता के अधीन समझा जाता है। अकेली महिलाओं को वहां असुरक्षित माना जाता है।

‘बीबीकोह’ का योगदान

लम्बे वक्त तक इस बस्ती की मुखिया रहीं ‘बीबीकोह‘ के नाम से पुकारी जाने वाली बी बी उल – जुकिया का 2016 में निधन हो गया। उनकी 38 वर्षीय बेटी अनीसा आजमी विवाहित है परंतु अब उसने इस बस्ती की मुखिया का कर्तव्य सम्भाल रखा है। बस्ती में प्रवेश करते हुए पहला घर उनका ही पड़ता है।

वह कहती है, “मेरी मां 15 साल पहले यहां आई थीं। उनके साथ 5 बच्चे थे।”

बीबिकोह‘ के पहले पति की मौत एक रॉकेट हमले में हो गई थी जिसके बाद अपने देवर से शादी करने को उन्हें मजबूर किया गया। बीमारी से उसकी भी मौत हो गई। वह लोगों के घरों में काम करके किसी तरह गुजर कर रही थीं परंतु काबुल में मकानों का किराया बहुत ज्यादा था। कुछ दूर स्थित जनाबाद में तब पहली विधवाएं बसने लगी थीं और ‘बीबीकोह‘ ने भी यहीं बसने का फैसला कर लिया।

यह तो स्पष्ट नहीं है कि जनाबाद में विधवाओं तथा महिलाओं की इस बस्ती को किसने बसाना शुरू किया था परंतु शुरुआत में यहां आई विधवाओं ने अन्य बेसहारा औरतों को यहां बसने के लिए प्रोत्साहित किया। उनका मकसद विधवाओं के रहने के लिए एक सुरक्षित तथा सस्ता परंतु पक्का ठिकाना विकसित करना था। यहां जब भी कोई विधवा बसेरा लेने के लिए आती तो एक-दूसरे को जान लेने और दुखड़ा बांट लेने के बाद वे बहनों की तरह रहने लगती थीं।

विधवाओं की पहाड़ी: जनाबाद Women’s Hill, Zanabad, Kabul
विधवाओं की पहाड़ी: जनाबाद Women’s Hill, Zanabad, Kabul

मेहनत से बसाई बस्ती

बीबीकोह‘ ने एक गैर-सरकारी संस्था की मदद से यहां महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए विभिन्न तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन शुरू किया।

कुछ समय बाद महिलाओं ने मिल-जुल कर सिलाई-कढ़ाई का काम करना शुरू कर दिया। इनमें ऐसी महिलाएं भी थीं जिन्हें चित्रकला और शिल्प का सहारा लेकर काम करने लगीं। आज जनाबाद कम से कम 500 विधवाओं का घर है जिनकी संख्या बढ़ती जा रही है।

जनाबाद पहाड़ी की सुरक्षा के लिए अब वहां एक अन्य छोटी सैन्य चौकी है। अनीसा के अनुसार सुरक्षा के लिए यह अच्छी बात है क्योंकि तालिबान से हर किसी को खतरा है।

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