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पेसिफिक क्रैस्ट ट्रेल: दुनिया का सबसे कठिन सफर

पेसिफिक क्रैस्ट ट्रेल: दुनिया का सबसे कठिन सफर

The Pacific Crest Trail (commonly abbreviated as the PCT, and officially designated as the Pacific Crest National Scenic Trail) is a long-distance hiking and equestrian trail closely aligned with the highest portion of the Sierra Nevada and Cascade mountain ranges, which lie 100 to 150 miles (160 to 240 km) east of the U.S. Pacific coast. The trail’s southern terminus is on the U.S. border with Mexico, just south of Campo, California, and its northern terminus on the Canada – US border on the edge of Manning Park in British Columbia; its corridor through the U.S. is in the states of California, Oregon, and Washington.

4,280 किलोमीटर लम्बा सफर, 20 किलो का ‘रकसैक’ (पिट्ठू बैग), 6 महीने और मंजिल तक पहुंचने का बेहद चुनौतीपूर्ण लक्ष्य – हर साल करीब 3,500 लोग अमेरिका में ‘पेसिफिक क्रैस्ट ट्रेल (Pacific Crest Trail)’ (पी.सी.टी.) को पूरा करने की कोशिश करते हैं परंतु चुनिंदा ही इस लक्ष्य तक पहुँचते हैं।

मैक्सिको से कनाडा सीमा इस लम्बे ट्रैक को पूरा करने के लिए लम्बी छुट्टी ही नहीं, तरह-तरह की कठिनाइयों के लिए खुद को मानसिक रूप से भी तैयार करना पड़ता है।

म्यूजिख (जर्मनी) के 52 वर्षीय यूजीन ने दक्षिण अमेरिका के सीमावर्ती शहर कैम्पो से अपनी पी.सी.टी.यात्रा शुरू की थी। पेशे से डॉक्टर यूजीन ने इसके लिए विशेष रूप से समय निकाला है। वह कहते हैं, “25 साल काम करने के बाद 6 महीने मोबाइल फोन बंद करके पूरी तरह रिलैक्स करने के अवसर के रूप में इस सफर को देख रहा हूं।”

उन्होंने कई साल पहले इस ट्रैकिंग के बारे में सुना और फैसला कर लिया था कि किसी न किसी दिन वह इसे आजमाएंगे। चुनौती को पूरा करने के लिए वह रोज लगभग 35 किलोमीटर चले। यात्रा के कई हिस्सों पर हाइकर्स को कई दिन मीलों दूर तक कोई घर, सड़क, शौचालय, दुकान नजर नहीं आती है यानी उन्हें कई दिनों के लिए भोजन-पानी साथ लेकर चलना पड़ता है।

दक्षिण कैलीफोर्निया में पानी के स्रोत दुर्लभ हैं और पर्याप्त पानी साथ नहीं रखने से जान भी जा सकती है। कई बार दूर-दूर तक मोबाइल फोन सिग्नल नहीं होता लेकिन जंगल की आग, बेहद जहरीले सांप रैटलस्नेक और उत्तरी इलाकों में तो भालू भी मिल जाते हैं।

इस ट्रैक का सफर अप्रैल में शुरू होता है तब दक्षिण कैलीफोर्निया खासकर मोजावे रेगिस्तान अधिक गर्म नहीं होता और न ही पर्वत श्रृंखला ‘हाई सिएरा’ में अधिक ठंड होती है।

रोज पैदल लम्बा सफर नहीं पर पाने वाले पर मंजिल तक नहीं पहुंच सकते। हर हाल में सितम्बर खत्म होने से फहले कनाडा पहुंचना होता है जिसके बाद वहां तेज बर्फबारी शुरू हो जाती है।

महीनों तक चलने वाला पेसिफिक क्रैस्ट ट्रेल का कठिन सफर:

रात होने पर ट्रैकर तम्बू लगाते हैं और भोजन करके स्लीपिंग बैग में सो जाते हैं। पहले हिस्से में रातें ठंडी और परेशान करने वाली हैं। तम्बुओं में पानी जमा हो जाता है और कपड़े गिले हो जाते शरीर में दर्द रहने लगता है और अगली सुबह वही सब फिर दोहराया जाता है, कई महीनों तक बार-बार।

रास्ते में ‘हाई सिएरा’ पर्वत श्रृंखला से भी गुजरना होता है जहां ठंड और पिघलती बर्फ से हाल बेहाल हो सकता है जिसमें पैर जिसमें पैर धंसने लगते हैं। इसके अलावा कितनी ही नदियों और जलधाराओं को भी पार करना पड़ता है।

जर्मन वासी मेरिएके तथा नॉर्वे के जान ने भी इस साल इस दुश्वार ट्रैक के बारे में हॉलीवुड अभिनेत्री रिज विदरस्पून अभिनीत फिल्म ‘वाइल्ड’ से जाना था और 22 वर्षीय मेरिएके ने तभी तय कर लिया कि 4,280 किलोमीटर लम्बा दुनिया का सबसे कठिन सफर को पूरा करने का प्रयास जरुर करेगी। नॉर्वे वासी अपने दोस्त जान को भी उसने इसके लिए राजी कर लिया।

मेरिएके के अनुसार आपको निरंतरता बनाए रखनी पड़ती है और खुद को दिन में कम से कम 8 घंटे चलने के लिए मजबूर करना पड़ता है। शुरुआत में पैरों पर पहले फफोलों के दर्द से गुजरने के बाद दोनों यात्रा को लेकर जोश से भर गए थे।

अधिकतर लोग बीच में छोड़ देते हैं पेसिफिक क्रैस्ट ट्रेल का सफर:

परंतु कई हफ्तों बाद जान ट्रैकिंग बीच में छोड़ने का फैसला लेता है। वे दोनों वक्त पर कनाडा पहुंचने लायक रफ्तार से बढ़ नहीं सके। मेरिएके को लगी चोट के अलावा जरूरी सामान लापता होने के कारण उनका कीमती समय खराब हुआ था।

हालांकि, मेरिएके ने मौसम बदलने तक अकेले सफर जारी रखने का फैसला किया।

दूसरी और यूजीन की हिम्मत भी जवाब देने लगी। ‘हाई सिएरा’ से गुजरने के अविस्मरणीय अनुभव के बाद उन्होंने मैमोथ लेक्स में ब्रेक लिया जिसके बाद वह 10 हफ्तों से चल रहे हैं, उनका वजन कई किलोग्राम कम हो चुका है और पैर जोड़ों में काफी दर्द है।

अब उनका लक्ष्य कनाडा पहुचना नहीं बल्कि 1,000 मील सफर पूरा करना है। उनमें अब और कई महीने तम्बू में सोने, एक जैसा खाने खाने की हिम्मत नहीं है। हालांकि, वह इसे अपनी हार नहीं मानते क्योंकि बेहद कठिन इलाके में 1000 मिल यानी 1,600 किलोमीटर का पैदल सफर भी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है।

~ मेरिएके तथा जान

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