जब इरिट्रिया इतावली उपनिवेश था तो यूरोपीय आधुनिकतावादी वास्तुशिल्पियों ने इस पूर्व अफ्रीकी देश को वास्तुकला के प्रयोगों के लिए खूब इस्तेमाल किया। राजधानी अस्मारा में स्थापत्यकला के कुछ ऐसे प्रयोग हुए जिनके बारे में वे अपने देश में सोच भी नहीं सकते थे। उस जमाने में हुए इन प्रयोगों की बदौलत ही आज ये यूनैस्को का विश्व धरोहर स्थल बन चुके हैं।
इसके बावजूद हाल ही में राजधानी अस्मारा यूनैस्को के विश्व धरोहर स्थलों की सूची में शामिल होने वाला विश्व का प्रथम ‘आधुनिकतावादी शहर’ बन गया है।
संयुक्त राष्ट्र के संगठन यूनैस्को ने; आविष्कारी नगर योजनाबंदी तथा अफ्रीकी परिप्रेक्ष्य में आधुनिकतावादी स्थापत्यकला’ के लिए इस शहर की प्रशंसा की है।
फिएट टागलिएरो गैस स्टेशन का ही उदाहरण लीजिए। इमारत को एक वायुयान के डिजाइन में बनाया गया है। इसके दोनों ओर विशाल परों तथा वायुयान जैसे अग्रभाग को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि बस उड़ने के लिए तैयार है। सम्भवतः यह इमारत आधुनिकतावादी स्थापत्यकला के सबसे दिलचस्प उदाहरणों में से एक है।
दमनकारी शासन:
इरिट्रिया को ‘अफ्रीकी उत्तर कोरिया’ भी कहा जाता है। पत्रकारों के लिए वहां प्रवेश पाना बेहद कठिन है और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि वहां विश्व की सबसे दमनकारी सरकारों में से एक का राज है। 1993 में इथियोपिया से स्वतंत्रता पाने के बाद से वहां एक ही सरकार की सत्ता रही है।
संयुक्त राष्ट्र भी सरकार को जनता को अपने नियंत्रण में रखने के लिए मानवता के विरुद्ध संगठित अपराधों का दोषी ठहरा चुका है। दमन तथा यातनाओं से बचने के लिए लाखों लोग भाग कर पड़ोसी देशों तथा यूरोप में शरण ले चुके हैं। 2014 तथा 2015 में भूमध्य सागर से होकर इटली पहुंचने वाले शरणार्थियों में इरिट्रिया वासियों की संख्या सबसे ज्यादा थी।
अनूठी स्थापत्यकला:
ऐसे हालात राजधानी अस्मारा की शानदार स्थापत्यकला रूपी अनूठी सांस्कृतिक विरासत के लिए एक विडम्बना ही है।
अनूठी स्थापत्यकला की वजह से अस्मारा को ‘लिटिल रोम’ या ‘अफ्रीका का मियामी’ जैसे नामों से भी पुकारा जाता है।
आधुनिक अस्मारा का निर्माण 1920 से 1940 के दौरान इतालवी उपनिवेशी शासन के दौरान हुआ था। उस वक्त यूरोप में आधुनिकतावादी स्थापत्यकला चलन में थी जिसमें सादगीपूर्ण स्पष्ट डिजाइनों का प्रयोग किया जाता था। ऐसे वक्त में घर से दूर अस्मारा में इतावली वास्तुशिल्पियों के पास मनमर्जी के प्रयोग करने की पूरी आजादी थी।
वैसे अस्मारा में इतावली स्थापत्यकला के अलावा जर्मन बाऊहास तथा फ्यूचुरिज्म शैली में बनी इमारतें भी देखी जा सकती हैं। घुमावदार डिजाइनों वाली कुछ सरकारी इमारतें इन शैलियों की ही उदाहरण हैं।
यहां के कई मकान जर्मनी के स्टुटगार्ड में बने बॉक्स जैसे आकार वाले आवासों से मेल खाते हैं। राजधानी में कई इमारतों में यूरोपीय तथा अफ्रीकी स्थापत्यकला का अनूठा सुमेल भी दिखाई देता है। 1938 में बना एंदा मरियम गिरिजाघर इसका उत्कृष्ट उदाहरण है जिसमें आधुनिकतावादी तथा पूर्वी अफ्रीकी स्थापत्यकला का एक साथ प्रयोग किया गया है। खास बात है कि 1930 तथा 40 के दशक की ये इमारतें आज भी काफी अच्छी हालत में हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात शहर का खास विकास नहीं हुआ है। 2001 में पुरानी इमारतों के संरक्षण के लिए नए निर्माण पर रोक लगा दी गई थी।
जहां अधिकतर अफ्रीकी शहर में तेजी से बेतरतीब निर्माण हुए हैं, वहीं इन प्रयासों की बदौलत ही अफ्रीका महाद्वीप के विभिन्न शहरों में अस्मारा सबसे हट कर दिखाई देता है।
ITP Indian Travel Places: Food, Travel, Tourism Business Events and Trade Shows